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पुलिस हिरासत में पिछले दो साल में 133 लोगों की मौत हुई: गुजरात सरकार

गांधीनगरः (सीधीबात न्यूज़ सर्विस)  गुजरात में बीते दो साल में पुलिस हिरासत में 130 से अधिक लोगों की मौत हुई है. राज्य सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी.

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सदन को बताया कि सरकार ने पिछले दो साल (30 अप्रैल 2019 तक) में पुलिस हिरासत में मारे गए लोगों के परिजनों को 23.50 लाख रुपए मुआवजा दिया है.

मालूम हो कि राज्य में पुलिस हिरासत में मौत का मामला निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने प्रश्नकाल के दौरान उठाया था.

मेवाणी ने यह भी जानना चाहा कि हिरासत में मौत के मामलों में जांच के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों और कनिष्ठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई.

रूपाणी ने उत्तर दिया कि पिछले दो साल में हिरासत में 133 लोगों की मौत हुई है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक मामले में एक पुलिस निरीक्षक, एक हेड कॉन्स्टेबल अैर एक कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया.

उत्तर के अनुसार, अन्य मामलों में तीन हेड कॉन्स्टेबल पर जुर्माना लगाया गया और एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षकों, पांच सहायक उपनिरीक्षकों, तीन हेड कॉन्स्टेबलों और तीन कॉन्स्टेबलों के नाम चार्जशीट में शामिल किए गए.

उन्होंने बताया कि सरकार ने हिरासत में मौत के मामलों की जांच के बाद एक एएसआई की वेतन वृद्धि रोकी और ग्राम रक्षक दल के दो जवानों को बर्खास्त कर दिया.

मालूम हो कि हाल ही में  1990 में हिरासत में मौत के एक मामले में गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

नवंबर 1990 में प्रभुदास माधवजी वैश्नानी नाम के एक शख्स की कथित तौर पर हिरासत के दौरान प्रताड़ना की वजह से मौत हो गई थी. उस समय संजीव भट्ट जामनगर में सहायक पुलिस अधीक्षक थे, जिन्होंने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर भारत बंद के दौरान दंगा करने के मामले में 133 लोगों को हिरासत में लिया था. इनमें से एक शख्स प्रभुदास माधवजी वैश्नानी थे.

इससे पहले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से पता चला था कि गुजरात में 2001 से 2016 तक पुलिस हिरासत में 180 लोगों की मौत हुई है. हालांकि इस दौरान किसी भी पुलिसकर्मी को इन मौतों के लिए सजा नहीं हुई थी.

Source:-Thewire

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